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सत्य एक भारी पदार्थ

सत्य हमारे ब्रह्माण्ड का सबसे भारी पदार्थ है। इसीलिए वह गहराईओं में पाया जाता है फिर चाहे वह हृदय हो या विशाल पर्वत। कमल

ब्रह्मज्ञान

कुछ ही दिनों पहलें की बात है| में बम्बई से अहमदाबाद की और ट्रेन से सफ़र कर रहा था और बारिश का मौसम था, इसीलिए खिड़की के बाहर का नज़ारा काफी खुशनुमा और आह्लादक था| मानो के गलती से इश्वर के हाथो से हरा रंग गीर गया और धरती पर आके फ़ैल गया हो! बस कुछ वैसा ही नजारा था| वृक्षों और वन जिस तरह दर्शन दे रहे थे की मानो उनके वहां दीवाली न हो! हरे नए कपड़ो में काफी सुंदर और घटिले लग रहे थे| में धीरे धीरे ध्यान में डूब रहा था! तभी मुझे एकाएक ख्याल आया की शायद मेरी ही नजर न लग जाए |  इसी खयालों में सूरत स्टेशन आ गया | मैंने एक बिक्रिवाले से पानी की बोटल ली और पांचसो का नोट थमाया...पर बिक्रिवाले के पास छुट्टे नहीं थे तो सुरत से ही सफर की शुरुआत करने वाले और मेरे बाजू की सिट में बैठे एक अपिरिचित व्यक्ति ने अपने जेब से बीस रूपये का नोट निकला और बिक्रिवाले भाई को दे दिया! मैंने भी कोई आनाकानी नहीं की! शायद् यह मेरा व्यवहार उनको भी काफी पसंद आया, फिर उनका शुक्रियादा करके मैंने कहा की,  “में आपके २० रूपये अभी छुट्टे करवा के दे देता हू”, फिर उन्होंने भी कोई ज्यादा बात नहीं की और “कोई बात नही...

इंसान, समस्याएं और ईश्वर

एक कण मात्र पृथ्वी की ब्रह्मांडमें क्या क़ीमत होगी यह एक इंसानने सोंच लिया किन्तु वोही इंसानकी समस्याओंका उसी ब्रह्माण्ड के सामने क्या कद होना चाहिए वह वो तय नहीं कर पाया! शायद कभी में यह सोंच कर घबड़ा जाता हूं कि कण के भी करोड़ो हिस्सोंके बराबर अपनी समस्याओ के लिए एक इंसान उस ईश्वर और ब्रह्मांड दोनो को दांव पर न लगा दे। - कमल